Friday, May 8, 2015

सूचना का अधिकार : क्या कोई और रास्ता भी है ?

यह अर्जी इग्नू में लगाने से पहले मैं इसे ब्लॉग पर इस लिए डाल रहा हूँ, ताकि जो लोग इस कानून के विरोध में है वे मुझे सुझाएँ कि क्या कोई और रास्ता भी है। जो लोग इस कानून में विश्वास रखते है में मार्गदर्शन करें कि इस अर्जी को और धारदार कैसे बनाया जा सकता है।


सेवा में,
पब्लिक इन्फोर्मेशन ऑफिसर,
स्कूल ऑफ परफोरमिंग आर्ट्स,
इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU)
नई दिल्ली।
विषय : सूचना का अधिकार अधिनियम – 2005 के तहत सूचनाएँ लेने हेतु।

महोदय,
विनम्र निवेदन है कि इग्नू से जो सूचनाएँ मुझे चाहिए उनका जिक्र करने से पहले मुझे उसकी भूमिका के रूप में कुछ कहना है।

आरटीआई की अर्जी की जरूरत क्यों पड़ी
महोदय, जो सूचना मुझे चाहिए वे किसी भी इंसान के लिए सहज सुलभ होनी चाहिए। लेकिन मैं पिछले दो महीने से  उन्हें प्रोपर  चैनल से प्राप्त करने की कोशिश कर रहा हूँ। बात दरअसल यह है कि मैंने विश्वविद्यालय की वेब साइट से पता किया कि यहाँ से  प्रदर्शनपरक कला में सर्टिफिकेट-नाट्य कला (सीपीएटीएचए) करवाया जाता है। जब मैंने इस कोर्स के लिए रीजनल केंद्र, जयपुर से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि इस कोर्स के अध्ययन की सुविधा यहाँ नहीं है, इसलिए आप विश्वविद्यालय के दिल्ली कार्यालय में संपर्क करें। तब, मैंने वेब साइट पर दिये नंबरों पर बारी-बारी से फोन मिलाया मुझे कोई मदद नहीं मिली। फोन लाइनों का रेस्पोंस निम्न प्रकार आया –
·     अधिकतर बार तो फोन कनेक्ट ही नहीं हुआ।  
·     कुछ नंबरों पर, “यह नंबर स्थायी रूप से सेवा में नहीं” की ध्वनि आई।
·     यदि दो चार बार कनेक्ट हुआ तो लंबी घंटी के बाद अपने आप कट गया यानि किसी ने उठाया नहीं।  
·     किस्मत से एक बार किसी ने फोन उठाया पर यहाँ भी बदकिस्मती देखो, उधर से आवाज़ आई, “आपका फोन पुस्तकालय में लग गया है, मैं आपको सही नंबर देता हूँ।” सही नंबर पर फोन लगाया तो किसी ने चोंगा ही नहीं उठाया।
हो सकता है यह यंत्रणा मेरे अकेले की ही न हो। अब आप ही बताइये आप एक दूरस्थ शिक्षा माध्यम वाले विश्वविद्यालय हैं। देश-दुनिया में हजारों मील दूर बैठा व्यक्ति कैसे आप से संवाद कायम कर पाएगा? वेब साइट पर सूचना पूरी नहीं है और फोन से डायलॉग हो नहीं पा रहा है। यह एक दूरस्थ शिक्षा वाले विश्वविद्यालय के लिए बहुत ही सोचनीय बात है।  यह तब और भी विचारणीय हो जाती है जब विश्वविद्यालय की आत्मछ्वि वैश्विक स्तर की हो।
महोदय, मेरी मजबूरी है कि फ़ोन पर बात हो नहीं रही है और दिल्ली आने की मेरे पास अभी फुर्सत व सामर्थ्य नहीं है। इसलिए आरटीआई के अलावा कोई विकल्प नहीं। अत:

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत निम्नलिखित सूचनाएँ प्रदान करें

  •      प्रदर्शनपरक कला में सर्टिफिकेट-नाट्य कला (सीपीएटीएचए)  का कोर्स क्या आपके विश्वविद्यालय से करवाया जाता है? यदि कभी-कभी नहीं करवाया जाता है तो उसका तर्कसंगत आधार क्या है?

  •  क्या अलवर या जयपुर, राजस्थान का निवासी, जिसकी थियेटर में रूचि है व रंगमंच से जुड़ा हुआ है, तथा आपकी वेब साइट पर इस कोर्स के लिए अपेक्षित सभी योग्यताओं को पूरा करता है, क्या वह इस कोर्स में प्रवेश पा सकता है ? यदि हाँ तो क्यों, नहीं तो क्यों?
  •   कृपया इस कोर्स की प्रवेश प्रक्रिया बताएं तथा अध्ययन के क्या चरण होंगे? 
  •    रीज़नल सेंटर पर यह कोर्स अनुपलब्ध है और आपकी वेब साइट पर यह उपलब्ध है। इस अद्भुत विरोधाभास का दस्तावेजी प्रमाण दें। यदि यह कोर्स राजस्थान के लिए उपलब्ध नहीं तो देश के किस कोने के खुशकिस्मत लोगों के लिए आपने यह सुविधा उपलब्ध करवा रखी है। यदि इसका जवाब दिल्ली है तो फिर क्यों न इसकी दूरस्थ शिक्षा की अवधारणा पर शक किया जाए? कृपया तर्कसंगत जवाब दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर दें।
  •    कम से कम कितने विद्यार्थी  होने पर आप एक कोर्स उस सत्र में करवाते है। आपको कैसे पता चलता है कि अमुक संख्या में विद्यार्थी उपलब्ध है? कोई नियम हो तो उसका प्रमाण दें।  
  •   आपकी फ़ोन लाइनों पर लोगों के फ़ोन को सुनना सुनिश्चित करने के लिए क्या कोई पॉलिसी या नियम बना हुआ है।
  •   क्या इस तरह का निरीक्षण किया जाता है कि फोन सुनने वाले अपने  उत्तरदायित्व का निर्वाह कर रहे हैं? कृपया दस्तावेजी प्रमाण दें।
  •   क्या रेस्पोंडेड व अनरेस्पोंडेड कॉल का ब्योरा रखा जाता है?

महोदय, मैं ये सभी सूचनाएँ सद्भावना पूर्वक मांग रहा हूँ, इस उम्मीद के साथ कि उपरोक्त संदर्भित कोर्स के प्रति पात्रता के बारे में जान सकूँ तथा इग्नू के सूचना सिस्टम के प्रति मेरे मन में जो विभ्रम पैदा हुआ है उसकी सफाई कर सकूँ।
धन्यवाद सहित
दलीप वैरागी



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