Monday, June 27, 2011

मीडिया का असली चेहरा कौनसा है ?

आज शाम को जब मैं टीवी पर न्यूज़ देख रहा तब बड़ी अज़ीब व हास्यास्पद स्थिति पैदा हों गई.  मैं पहले उस टीवी स्क्रीन के बारे में आपको बता दूँ जो किसी भी न्यूज़ चैनल पर दिखाई देती है . दरअसल समाचार चैनल टीवी स्क्रीन को दो तीन भागों में बाँट देते हैं, एक विंडो का मुख्य भाग होता है जहाँ ख़बर का विडियो  दिखाई देता है. दूसरा भाग वह पट्टी है जो मुख्य विंडो के नीचे होती है जिसमे ब्रेकिंग न्यूज की पट्टी चलती रहती है या फिर सारा दिन प्रसारित होने वाले न्यूज बारी-बारी से ब्लिंक होते रहते हैं. मसला दरअसल यह है कि आज शाम से ही सभी न्यूज़ चैनलों पर उत्तर प्रदेश पुलिस अफसरों द्वारा टीवी पत्रकारों की पिटाई की ख़बर प्रमुखता से आ रही थी. निसंदेह यह बहुत ही निंदनीय घटना है. समाचर प्रस्तुतकर्ता लगातार उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को  कोस रहे थे.  यह गिन-गिन कर बताया जा रहा था कि पिछले दिनों यू.पी. में कहाँ व कितने अपराध हुए हैं.  ये सभी चल रहा था तभी एक लंबा विज्ञापन मुख्य विंडो पर प्रकट होता है जिसमे यू.पी. सरकार के विकास कार्यों का महिमामंडन था . इस विज्ञापन ने मुख्य समाचार जो कि एक पत्रकार से बदसलूकी का था, को नीचे की पट्टी पर धकेल दिया . टीवी की स्क्रीन पर दो जगह पर दो विपरीत बाते चल रही थीं -
मुख्य विंडो पर विज्ञापन के रूप में  -
यू.पी. में सुराज आया है …लोगों को रोजगार मिले … सड़क निर्माण… शिक्षा, चिकित्सा, आवास … अमन चैन कायम हुआ… मजदूरों, किसानों, व्यापारियों के हित की रक्षा …कानून व्यवस्था तथा पक्षपात रहित न्याय लोगों को मिला है …इत्यादि .
नीचे की पट्टी पर -
पत्रकार पर हमला … यू.पी. पुलिस द्वारा पत्रकारों को पीटकर धमकाया … लोकतंत्र पर पर हमला … जनता की आवाज पर हमला …जंगलराज …इत्यादि .
ये दोनों संदेश एक ही स्क्रीन पर एक साथ चल रहे थे .  मैं दोनों में किसी को सही या गलत नहीं ठहरा रहा मैं तो यह जानना चाह रहा हूँ कि इसमें से मीडिया का असली चेहरा कौनसा है ?

1 comment:

  1. जो मीडिया दूसरों के चरित्र का पर्दाफाश करता है उसका खुद का चरित्र कितना निम्न स्थर काका है सही पकड़ा आपने

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